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Tuesday, November 29, 2016

इस दुनिया से जाना है एक दिन तो क्यों इस दुनिया के लिए लड़े

बाते इस जमाने की


 जिंदगी है चार दिन की तो क्यों लड़ने में इसे खोता हैं !!
खुद दुःख देता लोगो को और अपने दुःख पर रोता है !

टिक टिक कर के निकल गया जो समय बापस नही आएगा |
चंद दिनों  की है ये खुसी बाद में बहुत पछतायेगा

हर तमन्ना पूरी करले आज तेरा बक्त है
लेकिन बक्त भी आएगा गरीब का ये कुदरत का नियम बड़ा सख्त है |

हिन्दू मुश्लिम सिक्ख ईसाई हम सब का मालिक एक है|
लड़ बेठे हम धर्म के लिए जब की हमारा मालिक बड़ा नेक है ||

जाना है हम सबको एक दिन जानता ये हर इंसान |
तो जी ले और जीने दे सबको ना बन तू एक हेबांन ||

मिट्टी में मिल जायेगा ये जिश्म जिसपर हमें बड़ा नाज है |
भूल  जायेंगे हमे अपने ही , और जो पहचान हमारी आज है ||

दरिया बनकर किसी को डुबोना बहुत आसान है || मगर
जरिया बनकर किसी को बचाये तो कहि जाकर बात बने

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