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कहानी एक लड़के की

सही  कहा है किसी ने। ...

जीबन में जो बात खाली पेट और खाली जेब
सिखाती है बो बात कोई युनिबर्सिटी या 
शिक्छक  भी नही सिखाता

ये कहानी  एसे  ही  एक पलड़के की है जिस का नाम  था  सरफ़राज़ आलम ! सरफ़राज़ आलम  बहुत नेक और बहुत सीधा लड़का था !
उसे एक  बीमारी  थी टेंसन  की ! बो  हमेसा एक सोच और फ़िक्र में  रहता था ! बो इंसान ऐसा था के अगर उस से कोई  यु बोल देता की एक साल बाद में तेरे एक झापट मारूँगा तो बो अभी से ही उस एक साल के दिन की और झापट की टेंसन कर बैठता ! बो हमेसा अपनी दुनिया के फ़िक्र में लगा रहता था ! लेकिन सरफ़राज़ के अंदर बहुत सारी  खूबियां  भी थी ! के उस का दिमाक चलता नही था दौड़ता था , दूसरा बो झूट नही बोलता , किसी को  धोखा नही देता क्यों की बो अल्लाह को दिल   से  मानता था उसके  चार भाई थे  जिन  में एक  बड़ा  भाई था  जो की अपने भाई से प्यार तो करता था मगर      बो अपनी बीबी का गुलाम था ! उससे छोटा एक और भाई था  जो   की  बो भी सदी सुदा था और बो अपनी बीवी के साथ एक गांव  में रहता था  ! और उस से  छोटा जो बो जयपुर में पड़ता था ! और चौथे नंबर  का खुद सरफ़राज़ था ! उनके पिता ने उन्हें पालने के लिए बहुत ही कठीण  संघर्ष  किया लेकिन और बो अपने परिबार के पालन पोसण के के लिए  बाहां  से बहुत दूर  यानि सऊदी अरब  चले गए  !  फिर उनके घर की बागडोर  उनकी माँ के   हाथो   में  थी ! लईकिन परेसानी  और जब बढ़ गई जब उनकी माँ भी साउदी अरब चली गई ! हझ  के लिए लेकिन  बह भी  साउदी अरब उनके पिता के साथ साथ रहने लगी  !  अब  पूरे घर की बागडोर उनकी भाबी के  हाथो  में  आ गई जो कब से इस घड़ी का इंतज़ार  कर  रही थी ! उस की भाबी बहुत ही जल्लाद थी ! और इस बाक्त सिर्फ सरफ़राज़
ही घर पर रहता था और बाकि दो अपनी जगह पर ! और जो सब से बड़ा था बो  सफते में एक बार या दो बार घर आ जाया करता था !  सरफ़राज़  ने १०+आईटीआई  की हुई थी ! उस की भाबी    सरफ़राज़ से  गधो  की की तरहा काम कराती  ! और कभी सरफ़राज़ ने. किसी काम को करने से माना  कर  देता तो उसे खाना नही  मिलता अगर उसे कभी कोई सामान खरीदने के लिए  पैसे चाइये  थे तो उसे कहती के  कुम्हा ला और चला ले अपना खर्च  !  बो  बेचारा तो टेंसन का मरीज़  था अब उस के लिए सिर्फ   टेंसन    करने के इलाबा और कुछ नही बाचा था ! जब उस का भाई आता तो  उस से सरफ़राज़ की एक से दो लगा देती तो फिर उस का भाई उसे  मारता उस की हालत ऐसी हो  गाई के अब  कब मर जाए क्यों की  टेंसन कर कर के इतना सूख गया  के अब उस की कोई साब  पसलियों  को  गिंन  सकता  है !  बो   सोचता के कैसे भी  कर के  उस की बात उन के माँ बाप से हो जाए  !  बहुत तंग होने पर उस ने  खुदखुसी करने का फैशला किया  क्यों की घर में भाबी भाई तंग करते और
जब बो घर से  भार जाता तो कॉलोनी बाले उस का माजाक उड़ाते क्यों  की  बह बहुत सूख चूका था ! जब उस का दिल घर से    बिलकुल  भर गया तो  बह रेल्बे  इस्टेसन  की  ओर   खुदखुसी  के  निकला ! बो रोता हुआ जा रहा था और गहरी सोच मे डूबा सा  हुआ  चला जा रहा था ! जब बो इस्टेसन  पर  पहुचा तो  उसने देखा के अभी आधे घंटे तक कोई   भी  रेल आने बाली नही है ! तो बो ट्रेन  के इन्तज़ार  में  बैठ गया ! तो फिर बह देखता है  के एक पैर बाला  आदमी इस्टेसन पर कुछ बेच रहा है और बह उस थोड़े से सामान  को बेचकर काफी खुस है ! और अपने जीबन के बाकी दिनों  को काफी खुसी के साथ काट रहा है ! तो उस के भी दिमाक में  एक आईडिया आया और   बह सोचने लगा के अगर में खुदखुसी  करूँगा तो मेरा रब भी नाराज़ और मेरे माँ बाप तो शेन  नही  कर पाएंगे मेरी मोत को ! तो  बो घर पर बापस आ गया !और उसने   अपने यार दोश्तो पर से जैसे  तैसे  कर के  ५०० रूपये किये  ! अब  रात को जब सब सो गाये तो उसने अपने कुछ कापड़े और  अपने जरूरी डोकोमेन्स और  पहचान पात्र लिए और  भाहां    से भागने के लिए तैयार हो गया  ! और हिम्मत  कर के घर से  भार निकाल आया  बह अपनी  कॉलोनी से निकल कर रोड पर   पहुचा    की इतने में उसे पुलिस की जीप गश्त करने बाली मिल  गयी और उससे  पूछने लगी ' खा जा रहा है बे इत्ती रात गाये तू।   कोई चोरी शोरी  कर के ले जा रियो का  . बता क्या है  थेले  में  उस की  तालासी  ली जाती है और  जब उस के बेग में कपडे और  डोकोमेँट्स  निकालते है तो बो उसे स्टूडेंट समझ कर  छोड़ देते  है ! फिर थोड़ी ही देर में एक रिक्सा बाला आ जाता और बो उस में  बैठ कर इस्टेसन  चला जाता है ! इस समय सरफ़राज़ का दिल बहुत. तेजी के साथ धडक रहा था क्यों की बह अपने जीबन  में  एक बहुत बाड़ी जुम्मेदारी में आपने आपको ढाल  रहा था अब उसे अपने  ज़िंदा   रखने  के लिए अपने आप को ही मेहनत करनी होगी ! बह रात को  २  बजे जयपुर के लिए राबाना हुआ !उस का दिल घबरा भी रहा था और खुस भी  था ! बो सुबह जयपुर पहुच गया  और अब उस के  पास ३०० रूपये बचे थे ! बो जयपुर में काम के लिए इधर उधर डोला  लेकिन उसे कोई काम ना मिला !  अब उस के पास जो पैसे थे  बो भी खत्म हो  गए सिबाय २०  रूपये के ! उसे भूक लागि तो बो  पहले तो सोचता रहा के होटल बाले उसे मारेंगे पुरे पैसे ना दिए तो ! उसे अब जयपुर में भूखे डोलते डोलते २ दिन हो गए अब तो बो  २० रूपये भी खर्च हो गाये !  एक रात को बो एक होटल में घुस गया   जब उस अपनी भूक ना  रुक सकी तो ! उसने खाना तो खा लिया  लेकिन अब बो क्या करे क्यों की उस के पास देने के लिए रूपये नही थे ! बह उठा और होटल मालिक के पास जाकर बोल दिया  के मेरे पास पैसे नही  ! होट ल मालिक  ने उशे  एक गुस्से भरी निगाह  से देखा और बोला।   कल्लू  लेके जा इस मादरचोद को बर्तन  माजने के लिए और सारे  बर्तन ढाल दे इसके पास में  खा खा से आ जाते  है  साले। ...  सरफ़राज़ ने अपना बेग एक तरफ रखा  और लग गया बर्तन माजने ! अब  सारे होटल के  गिरहको  के   बर्तन उसे ही  डाले जा रहे थेऔर  बेचारा सरफ़राज़ गर्दन को नी ची  कर  के बर्तन मजे जा रहा था सर्दियों के दिन बह  कांपता जा रहा था और बर्तन धोता  जा  रहा था ! होटल का मालिक इस सारे   मंज़र को देख रहा था ! इतनी ही देर में एक गिरहाक खाना खा कर   वहार निकला की अचानक उस का परस गिर गया और उस प्रश   पर सरफ़राज़ की नज़र गई और बह भाहां  से उठा और उस प्रश को उठाया और उस आदमी को दिया जिस का ये प्रश था ! होटल मालिक ने जब यह सारा मंज़र देखा तो खुस हुआ और उस लड़के पर उसे रहम आया उसने उसे अपने पास बुलाया और उस से जयपुर में क्यों और खा आया ये पूंछा तो लड़के ने अपनी सारी स्टोरी सूना दी , तो होटल मालिक को बड़ा रहम आया और फिर  उसे अपने होटल में काम पर रक लिया  और  अब  बह इसी होटल में रहने. लगा ! सरफ़राज़ की होटल मालिक ने  उस की ईमानदारी की काफी  इम्तहान लिया लेकिन  बह ईमानदार निकला तो होटल  मालिक  ने उसे मैनेजर बना दिया और अब तो पेसो के काउंटर पर भी  सऱफराज़  बैठता ! सरफ़राज़ बांह ३ महीने तक रुका और  भाहां  सरफ़राज़  बे टेनसन रहता खाता  तो सरफ़राज़ की  भाहां   खूब  हेल्त बन गई थी ! और अब सरफ़राज़ खूबसूरत लगने लगा पहले  जैसा ! लेकिन अचानक ही उस की नज़र उनके भाई और भाबी  पर पाड़ी जो उसे डुडते हुए  जयपुर आ गए और बो इसी होटल  के पास आ रहे थे तभी सरफ़राज़ होटल मालिक के पास गया और  उनके आने की बात कहि और खुद अंदर चुप गया ! तभी उनके भाई और भाबी भाहा पहुच जाते है और होटल मालिक को सरफ़राज़ के बारे में पूछते है ! होटल मालिक उनसे मना  कर देता है. तो भह  होटल मालिक से लड़ने लग जाते है क्यों की किसी ने उन्हें. सरफ़राज़ के बारे में बता दिया था ! बो पुलिश को लेन की दमहकी  देते है फिर जैसे तेसे  कर के उन्हें भहां  से भगाया  ! फिर  होटल. मालिक सरफ़राज़ के पास आया और बोला के अब  में   आपको  यहां नही रख सकता  ! होटल मालिक ने उसे ३ महीने  लेकिन आपने किराया तो बताया नही ?
जो आपकी मर्ज़ी हो दे देना !
नही। ..... आप पहले  मुझे किराया बताइये तब म कुछ सोचूंगा  !
तो ठीक है  आप 500 रूपये महीने दे देना !
ओके। ........
सरफ़राज़  को मुनेश अपने घर जरूर बुलाना  चहाता था  क्यों की राजेश  नाम का उनका एक लड़का था जो की एक एक्सीडेंट में स्कूल. से आते बाक्त मर गया था  ! इस सादमे को उसकी माँ शेन  नही कर पाई और  बह   बहूत ज्यादा बीमार हो गई !   हमेसा बो  राजेश  राजेश लगी रहती है  और सरफ़राज़ की सकल और पूरा सरीर उस राजेश से  हु ब हु मिलता था तो उसने सोचा की क्यों न  इसे  राजेश  कर उसकी माँ के सामने लाया जाये तो क्या पता उशे कुछ. राहत पहुचे ! क्या पता बो  ठीक हो जाए ! बो ऐसी ही बाटे  सोच रहा था की  उसकी लड़की को होस आया और
पापा राजेश ...... ?
नही  बेटा बो अपना राजेश नही है !
है पापा अपना राजेश तो मर गया तो म उस से दर गई और मुझे लगा के हमारे घर  भूत आ गया ! है !
नही  बेटी ऐसा नही बोलते और अब बो हमारे ही. घर रहेगा हमारी राजेश. बन कर ताकि आपकी माँ  की कुछ तबियत ठीक हो जाये 
इतनी देर में सरफ़राज़ अपना सामान  लेकर बहां आता है तो उनकी कॉलोनी में जो भी सरफ़राज़ को देखता है बो राजेश।   .....
ऐसा जरूर कहता है और उसे गोर के साथ देखने लग जाता है !सरफ़राज़ के दिमाक में ये नही आ रहा था के ये हो क्या  रहा है  !
पर जाने दो बो सीधा उस घर में घुस जाता है उसने देख मुनेश बहुत खुस होता है  ! मुनेस सरफ़राज़ को उस का रूम बताता है जो की पहले राजेश का था ! सफराज उस को  देखता है तो देखता ही रह जाता है क्यों की. उसने अपनी ज़िन्दगी में काभी ऐसा रूम नही देखा था ! सरफ़राज़ को कुछ सही नही लगा और बह सोचने लगा के इतना बड़ा पैसे बाला इसने मुझे किराए पर कमरा कैसे दे दिया  और इसने इतने अच्छे रूम के सिर्फ 500 रूपये लिए है और ये  साला जो भी मुझे देखता है यहां  पर बो राजेश राजेश क्यों बोलता है  कुछ तो दाल में काला है । ...... तो सरफ़राज़ से रहा नही जाता है और बो मुनेश से पूछ लेता है !
 अंकल आप मुझे ये बताइये  आप इतने बाड़े पैसे बाले फिर आप ने इतना अच्छा  रूम  किराए पर क्यों दे दिया , और आपने किराया भी इतना  कम लिया है , और  सबसे मेंन  बात ये  आप और  आपकी लड़की  यहां तक की आपकी कॉलोनी बाले भी मुझे राजेश  राजेश  कह रहे है क्यों ?  आखिर कोण है ये राजेश और मेरा उस   से क्या  बास्ता है?  आखिर क्या ?
तो मुनेश बोलता है 
बेटा राजेश और  कोई नही मेरा बेटा था ! बो अपने स्कूल से   था तो  राश्ते में उस की स्कूल  बस का एक्सीडेंट हो गया जिस तीन बच्चे  मर गए जिन में  मेरा राजेश भी था ! मेने तो ये  गम जैसे तैसे  बर्दाश्त. कर लिया लेकिन राजेश की  इसका बहुत बड़ा सदमा पहूच गया. जिसे बो सहन नही  कर पाई और उस की भी तबियत बहुत  बिगड़ गई और हमेसा मेरे राजेश को  आओ  चिल्लाने लगी रहती है आज  राजेश को मरे हुआ पुरे ६ महीने हो गए है  लेकिन हमारे. घर में अब भी मातम सा  छाया रहता है ! ये कहते हुआ उस की आखो में  आंसू  जाते है ! 
तो सरफ़राज़ कहता है  ओ। ........
बहुत बुरा  आपके वच्चे के साथ !
और सरफ़राज़ एक दुख ज़ाहिर  है और फिर बोलता है पर अंकल  ये बताओ. के ये सब मुझे  राजेश क्यों कह रहे है ?
बेटे तुम  राजेश  की  तरहा दिखते हो तुमारा   चेहरा बिलकुल राजेश   से  मिलता है और बेटे में आपको कितने भी पैसे देने को तैयार हु आप  कुछ  दिन के लिए मेरा राजेश बन जाओ ! 
सरफ़राज़ को उस पर रहम आया और  बह सरफ़राज़ से राजेश बन गया ! दूसरे दिन उसे राजेश के कपडे पहना  कर  राजेश की माँ जी  कमरे  में थी ले जाया गया ! जब माँ की नज़र राजेश पर पाड़ी तो  बो  बहुत  खुसी  हुई और  गले से लागाया  बहुत खुस हुई !
लेकिन ६ महीने  से बीमार थी तो चल भी नही पा रही थी !
माँ बोलती है  कहां  था  इतने दिनों से बोलो अपनी माँ को. भी भूल गया   क्या  तेरे बिना इक पल की जिंदगी भी जीने का दिल नही  चाहता !     अब  तो नही जाएगा ना मुझे छोड़के  बोलो  बोलो ना... ! हां  माँ अब में आपको कहि छोड़कर नही जाऊंगा इतना कह कर रफ़राज़ का भी दिल भर आता  है और आखो में आंसू  आ जाते है. ! 
अब सरफ़राज़  ने सब काम छोड़ दिया क्यों की राजेश के पिता  बड़े  बिजनिसमैन थे  उनकी चार कारखाने थे जिनमे  करोड़ो का ब्यपार. होता था ! अब सरफ़राज़  भी पूरी तरह  राजेश ही बन  गया  था   और अब राजेश की माँ भी अच्छी हो गई थी सरफ़राज़ अब  यहाँ  के घर बालो  का एक सदश्य बन गया ! अब  सारे कारखाने  सरफ़ारज़ के नाम हो गए सरफ़राज़ अब बहुत पैसे बाला  बन गया   लेकिन सरफ़राज़ ये पता नही के सरफ़राज़ घर से कब  का  निकला है ! एक रात सरफ़राज़ को एक सापना आया की कोई  बूढी  औरत नदी के किनारे  बैठ  कर रो रही  और कुछ नाम भी ले रही है  सरफ़राज़ उस के करीब जाता है तो देखता है के  बाह तो  उस की माँ है   और बो सरफ़राज़  सरफ़राज़  बोल रही है  इतने में उस की आँखे खुल जाती है  और  बह बेट जाता है  फिर उसे अपने घर और माँ बाप की याद आने.  लगती है तो फिर  बह  याद करता   अपने  घर  से निकले  हुए  पुरे ६ साल हो गई और उस का दिल बेचान  हो जाता है ! बो याद करता है अपने माँ बाप के प्यार को ! बो  फिर   पूरी  रात नही सोया और सुबह होने का  इंतज़ार करता  है. जब सुबह होती है तो  बह  मुनेश के पास जाता जिसको अब सरफ़राज़ ने  पापा कहना सिरु  कर दिया था !
पापा मुझे आपसे जरूरी बात करनी है ! मुनेश उस के पास आता है और कहता  है
हां बोलो बेटे ?
पापा  में घर जाना चाहता  हु !
बेटे ये आपका ही तो घर है यहां रहिये खूब सोक से !
 पापा प्लेस मुझे अपने घर जाना है !
ठीक है  बेटा  लेकिन याद रखना ये जो तुम्हारी माँ है ना ये तुम्हारे. बगेर. नही रह  पाएगी  इस लिए बेटा जितना जल्दी हो सके जल्दी आ जाना  !
सुकरिया पापा म जल्दी ही  बापस लोट आऊंगा !
सरफ़राज़ अब अपने घर जाने की तैयारी कर रहा था के राजेश की माँ आती है और उससे जाने के बारे में पूछती है  तो  बह कह देता है के. म किसी मीटिंग में  जा रहा हु और मुझे 2-3  महीने लग सकते है. तो बह रोने लग  जाती है !  तो सरफ़राज़ उसे चुप पड़ता है और उसे  जल्दी आने का  पिरोमिस करता है ! सरफ़राज़ अपने घर  बालो  के लिए बहुत सरे कपडे और बहुत कीमती कीमती तोहफे  ले  और  बहुत सारे पैसे भी सात में लाता है !  सरफ़राज़   जैसे  तैसे  के  अपने घर आ गया झहां  उसका जन्म हुआ !  बो  जयपुर तक फिलाइट में और जयपुर से उसने फिर एक  अच्छी  कार खरीदी और जयपुर. से फिर अपने घर बो अपनी  कार से आया ! जब  कार उनके घर के आगे रुकी तो सब की नाजरे उस  कार पर और जब  सरफ़राज़ ने गेट खोला तो सब की निगाहें सरफ़राज़ पर  ! इतना  खूबसूरत लग रहा था के सब उसे देखते रह गए लेकिन किसी ने पहचाना नही ! सरफ़राज़ ने सालाम किया   आबाज़ सुनकर अंदर से एक ओरात चिल्लाती हुई आई ये तो सरफ़राज़ की आबाज़ है.  और ये  ऒरत सरफ़राज़ की माँ थी !  उस की माँ ने उसे देखते ही पहचान लिया और   बहो में भर लिया और गले से लिपट   कर रोने लग गई सरफ़राज़ का पिता भी उसे पहचान गया ! और पूरी. कॉलोनी में तहलका मच गया के सरफ़राज़ आ गया !
अब सरफ़राज़ से सलबाल जाबाब  होने लागे ! सरफ़राज़ ने सब साबालो  का जाबाब दिया  और उन्हें  अपनी पूरी  कहानि  सूना दी ! ये कहानि  सुन  कर सरफ़राज़ के माँ बाप उस के भाई और भाबी  को सबक सिखाने  के लिए जाने लगते है तो सरफ़राज़ मना   कर देता  है और कहता है के २  महीने बाद में आप मेरे साथ ही कोलकाता  चलोगे और अब बहां ही आप मेरे साथ उस  फेमेली के साथ रहोगेसरफ़राज़ अपने  घर बालो के साथ खूब खुसी के साथ काटता  है सरफ़राज़  यहां के गरीबो की भी कुछ सेबा पैसे  देकर करता है ! सरफ़राज़ के दो महीने पूरे होने पर बह  अपनी कार को अपने भाई को दे देता है और अपने माँ बाप को लेकर  बह अपने साथ कोलकाता ले जाता है और  बहां उसी परिबार के साथ मिल  कर रहता है और जो राजेश के माँ बाप है उनको. बह समझा देता है और फिर सब साथ मिलकर खूब खुसी के साथ रहते है

THE - END
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