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Tuesday, November 22, 2016

ज़िन्दगी एक आइना

ज़िन्दगी एक आइना

हेल्लो दोश्तो

दोश्तो क्या आप जानते हो की आइना क्या होता है ?
अब  सायद आपको लगेगा के या तो खुद पागल   है या हमें समझ रहा है !, लेकिन दोश्तो में आपको बता दू के आइना दो तरह के  होते है  नंबर एक   बह आइना  जिश्मे  हम आप अपने आप  को देखते है बो और एक बह आइना जिश्मे हम अपने आप को  देखना  पसंद नही करते !  यानि यह हमारे अंदर का मन हमारी आत्मा हमारी रूह का आइना है !  अब आप सोच रहे होंगे की  एशा आइना  कहां होता है !  दोश्तो  बह आइना होता है  दुशरो में होता है के जब  हम  कोई गुनाह  कर रहे होते है तो सामने  बाला  हमें   तुरन्त  रोक देता है क्यों की उस के अंदर  हमारी दुह का  आइना लगा हुआ है ! दोश्तो हम अपनी खूबसूरती को  बहार से देखकर बड़े खुस होते है लेकिन जो हमारी रूह है बह कितनी  गन्दी हो गई है  ये हम ने कभी नही सोचा !
दुनिया के मसहूर  शायर  मिर्ज़ा  ग़ालिब  ने  कहां  है

ज़िंदगी  भर  यही भूल  करता रहा ग़ालिब
धुल  चहरे पर थी और आइना साफ़ करता रहा !!

और आज यही  हाल हमारा होता जा रहा है के हमारे अंदर कहे चाहे हजार बुराई  हो लेकिन हम दुशरो में हम बुराई ढूढते है !  अगर हम अपने आप को एक अच्छे  राश्ते  पर ले आएँगे तो सामने  बाला अपने आप हमसे अच्छा  ब्यबहार करेगा !

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