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ढाई अक्षर प्रेम के

                                               ढाई अक्षर प्रेम के
मुहब्बत होती बड़ी प्यारी है लेकिन मुहब्बत को मुहब्बत की निगाहों से देखने बालो के लिए ही मुहब्बत बड़ी प्यारी लगती है , कुछ लोग मुहब्बत को पैंसो  से खरीदना कहते है लेकिन मुहब्बत को न ही किसी ने खरीदा है ना ही इसे कोई खरीद पायेगा , जो लोग ये दबा करते है की  उन्होंने मुहब्बत को खरीदा है  तो बो सुन ले की उन्होंने सिर्फ जिस्म को खरीदा  है मुहब्बत को नही , मुहब्बत करने बालो को अपना महबूब इतना प्यारा लगता ह के अगर दुनिया की   दौलत एक तरफ और उस का महबूब एक तरफ तो बह  अपने महबूब को  पसन्द करेगा , अपने महबूब की एक  झलक पाने के लिए बह  सब कुछ लुटाने को तैय्यार हो जाता है  ये है मुहब्बत। ... पर  मुहब्बत भी कई तरह की होती है जैसे की कोई सिर्फ हुस्सन के लिए किसी से मुहोब्बत करता है तो कोई उसे पेसो के लिए मुहब्बत करता है कोई किसी मकसद के लिए तो कोई किसी मकसद के लिए  , बहुत काम ही ऐसे लोग है जो अपने महबूब को सच्ची मुहब्बत करते है जैसे की लेला  मजनू , हीर और रांझना  ऐसी मुहब्बत सिर्फ किस्मत बालो को ही मिल पति है और कई लोग तो ऐसे होते है की बो अपने महबूब को सच्ची मुहब्बत करते है और उन के महबूब को पता तक नही होता के कोई उसे मुहब्बत करता है  इसी लिए लोग कहते ह ना ,
    के मुहब्बत दोनों तरफ से होती ह तो  मज़ा देती है 
  अगर मुहब्बत एक तरफ से होती ह तो सजा देती है
सच्ची मुहब्बत पाने के लिए लोग क्या क्या नही करते , यह तक के बो अपने आप को भी बर्बाद कर देते है और जब मुहब्बत  में धोका मिल जाये तो या तो उन को ये दुनिया से नफरत  हो जाती है और बो ये दर्द बर्दाश्त नही कर  पते तो या तो बो इस दुनिया को ही छोड़ देते ह या फिर बो अपने आप को इस दुनिया से अलग कर  लेते है फिर उन्हें इस मुहब्बत की बात ही झूटी लगती ह और जो कोई उन से मुहब्बत की बात करता है  तो उनको बो एक कहानी सी लगती है इस लिए दोश्तो मुहब्बत भी सोच कर करो , क्यों की मुहब्बत को भी खुद ने खुद मुहब्बत से बनाया है
मुहब्बत होती बड़ी प्यारी है लेकिन मुहब्बत को मुहब्बत की निगाहों से देखने बालो के लिए ही मुहब्बत बड़ी प्यारी लगती है , कुछ लोग मुहब्बत को पैंसो  से खरीदना कहते है लेकिन मुहब्बत को न ही किसी ने खरीदा है ना ही इसे कोई खरीद पायेगा , जो लोग ये दबा करते है की  उन्होंने मुहब्बत को खरीदा है  तो बो सुन ले की उन्होंने सिर्फ जिस्म को खरीदा  है मुहब्बत को नही , मुहब्बत करने बालो को अपना महबूब इतना प्यारा लगता ह के अगर दुनिया की   दौलत एक तरफ और उस का महबूब एक तरफ तो बह  अपने महबूब को  पसन्द करेगा , अपने महबूब की एक  झलक पाने के लिए बह  सब कुछ लुटाने को तैय्यार हो जाता है  ये है मुहब्बत। ... पर  मुहब्बत भी कई तरह की होती है जैसे की कोई सिर्फ हुस्सन के लिए किसी से मुहोब्बत करता है तो कोई उसे पेसो के लिए मुहब्बत करता है कोई किसी मकसद के लिए तो कोई किसी मकसद के लिए  , बहुत काम ही ऐसे लोग है जो अपने महबूब को सच्ची मुहब्बत करते है जैसे की लेला  मजनू , हीर और रांझना  ऐसी मुहब्बत सिर्फ किस्मत बालो को ही मिल पति है और कई लोग तो ऐसे होते है की बो अपने महबूब को सच्ची मुहब्बत करते है और उन के महबूब को पता तक नही होता के कोई उसे मुहब्बत करता है  इसी लिए लोग कहते ह ना ,
    के मुहब्बत दोनों तरफ से होती ह तो  मज़ा देती है 
  अगर मुहब्बत एक तरफ से होती ह तो सजा देती है
सच्ची मुहब्बत पाने के लिए लोग क्या क्या नही करते , यह तक के बो अपने आप को भी बर्बाद कर देते है और जब मुहब्बत  में धोका मिल जाये तो या तो उन को ये दुनिया से नफरत  हो जाती है और बो ये दर्द बर्दाश्त नही कर  पते तो या तो बो इस दुनिया को ही छोड़ देते ह या फिर बो अपने आप को इस दुनिया से अलग कर  लेते है फिर उन्हें इस मुहब्बत की बात ही झूटी लगती ह और जो कोई उन से मुहब्बत की बात करता है  तो उनको बो एक कहानी सी लगती है इस लिए दोश्तो मुहब्बत भी सोच कर करो , क्यों की मुहब्बत को भी खुद ने खुद मुहब्बत से बनाया है
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एक गरीब की दर्दनाक प्रेम कहानी ! A dangerous love story

दोस्तो प्यार कुछ चीज़ ही ऐसी बनाई है खुदा ने के जिस को एक बार हो जाता है ना तो उसे अपने महबूब की हर अदा पसंद आती है । 

महबूब की चाल , महबूब की आबाज,
महबूब की आँखे....
दोस्तो उस की तारीफ तारीफ किये जाता है लेकिन बो.....  जो बाकई अपने महबूब से प्यार करता हो । तो उसे अदा पंसद आती है ।
बर्ना आपको तो खूब पता है के आज के नौ जबानों को क्या पसंद आती है ।
चलो जाने दो हम तो हमारी कहानी पर आते है ।
दोस्तो आज मैं एक ऐसी ही कहानी लाया हूं जिसे सच मे पड़ कर आप बर्दास्त नही कर पाएंगे ।
तो चलो अपनी कहानी पर आते है ।

एक शहर में एक बहुत बड़ा  business man  रहता था जो कि साथ मे नामी गुंडो से मिला जुला था । यानी उस की गिनती दबंगो में होती थी । सब उस से डरते थे । उस की एक लड़की जिस का नाम था रीनू । 





रीनू बहुत ही बदमास और  नटखट किस्म की लड़की थी । जो कि हमेसा किसी को ना किसी को छोटी छोटी बात  पर सजा देती रहती थी । रीनू किसी पर भी दया नही करती थी । क्यो की उसे अपने पापा की इस ताकत पर घमण्ड था । बो इंसान को इंसान नही समझते थे । सब से दादागिरी से बात करना । बही दूसरी तरफ एक लड़का था जिस का नाम था सूरज


 सूरज था तो एक…

मुहब्बत की एक अजीबो गरीब प्रेम कहानी ।

दोस्तो आज के इस युग मे आज से क्या बल्कि बहुत पहले से ही जब से ईशबर ने इंसान के सीने में दिल दिया है तब से और आज तक सायद ही ऐसा कोई इंसान हो जिस ने कभी ना कभी किसी से प्यार ना किया हो ....!चाहे बो कैसे भी और किसी भी रूप में हो ।
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कोई भी काला या बदसूरत पासन्द नही करता । पर आपको शायद ये पता नही के खूबसूरती तो चंद दिनों की होती है असल तो मुहब्बत कायम रहती है । पार्टनर चाहे कैसा भी हो लेकिन अगर उस के अंदर आपके लिए मुहब्बत है तो आपके पास दुनिया की सारी खुशियां है और मुहब्बत नही है तो उस के पास चाहे दुनिया की सारी दौलत हो लेकिन उस की ज़िंदगी  उसे अच्छी नही लगती ।
दोस्तो आज मैं आपके सामने एक ऐसी ही प्रेम कहानी लेकर आया हु जिसे पड़ कर आप सोचने पर मजबूर हो जाएंगे ।
एक सहर में एक ब्यापारी का लड़का रहता था । जो कि बहुत ही नटखट था । बो बहुत ही सुंदर और चालाक था ।


 हमेसा मौज़ मस्ती । दिन भर दोस्तो के साथ रहना , खाना पीना , आशिकी और दिल लगी करना सब एक खेल सा था उस के लिए  लकडियाँ पटाना । उन से पैसे ऐठना सब उस के लिए आसान था । बो…

गरीब के दिल की ह्मदर्दी । कहानी एक सफर की

दोस्तो ये दुनिया बहुत बड़ी है । और इस दुनिया मे सब तरहा के लोग है ।



जैसे :- अमीर गरीब , काला गोरा , लाम्बा छोटा , मोटा पतला हर तरह के लोग रहते है और दिल सब के पास रहता है लेकिन ना जाने क्यों ये कमबख्त दिल है ना किसी किसी का सिर्फ धडकने का काम करता है और किसी किसी का दिल है जो दो काम करता है ।
एक तो खुद के लिए धड़कता और एक दुसरो के लिए ।
कैसे....????
चलो मैं बताता हूं  कैसे दुसरो के लिए धड़कता है । गर्मियों के दिन थे । स्कूल की छुट्टियां सिरु हो गई तो मैने और मेरे कुछ दोस्तो ने कहि घूमने का पिलान बनाया ।

 मेने अखबार में देखा के एक बस घुमाने के लिए जा रही है जो कि 3 हजार रुपये में एक सप्तहा घुमाएगी । तो मैने मेरे तीन दोस्तो को ये बात बताई और हम तैयार हो गए । हम चारो ने अपने बैग तैयार कर के जयपुर हो लिए राबाना हो लिए  और उस बस बाले से जा मिले जो कि सात दिन के टूर पर जा रही था । हम  चारों ने तीन तीन हजार रुपये जमा करा दिए । हमारे आने से बस की सारी सीटे फुल हो गई और बस राबाना हो गई । मेरे तीन दोस्त एक सीट पर थे और में एक सीट पर बैठा था जिस पर एक अंकल और एक आंटी और एक उनका छोटा सा बेबी था ।…