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Tuesday, November 22, 2016

ढाई अक्षर प्रेम के

                                               ढाई अक्षर प्रेम के
मुहब्बत होती बड़ी प्यारी है लेकिन मुहब्बत को मुहब्बत की निगाहों से देखने बालो के लिए ही मुहब्बत बड़ी प्यारी लगती है , कुछ लोग मुहब्बत को पैंसो  से खरीदना कहते है लेकिन मुहब्बत को न ही किसी ने खरीदा है ना ही इसे कोई खरीद पायेगा , जो लोग ये दबा करते है की  उन्होंने मुहब्बत को खरीदा है  तो बो सुन ले की उन्होंने सिर्फ जिस्म को खरीदा  है मुहब्बत को नही , मुहब्बत करने बालो को अपना महबूब इतना प्यारा लगता ह के अगर दुनिया की   दौलत एक तरफ और उस का महबूब एक तरफ तो बह  अपने महबूब को  पसन्द करेगा , अपने महबूब की एक  झलक पाने के लिए बह  सब कुछ लुटाने को तैय्यार हो जाता है  ये है मुहब्बत। ... पर  मुहब्बत भी कई तरह की होती है जैसे की कोई सिर्फ हुस्सन के लिए किसी से मुहोब्बत करता है तो कोई उसे पेसो के लिए मुहब्बत करता है कोई किसी मकसद के लिए तो कोई किसी मकसद के लिए  , बहुत काम ही ऐसे लोग है जो अपने महबूब को सच्ची मुहब्बत करते है जैसे की लेला  मजनू , हीर और रांझना  ऐसी मुहब्बत सिर्फ किस्मत बालो को ही मिल पति है और कई लोग तो ऐसे होते है की बो अपने महबूब को सच्ची मुहब्बत करते है और उन के महबूब को पता तक नही होता के कोई उसे मुहब्बत करता है  इसी लिए लोग कहते ह ना ,
    के मुहब्बत दोनों तरफ से होती ह तो  मज़ा देती है 
  अगर मुहब्बत एक तरफ से होती ह तो सजा देती है
सच्ची मुहब्बत पाने के लिए लोग क्या क्या नही करते , यह तक के बो अपने आप को भी बर्बाद कर देते है और जब मुहब्बत  में धोका मिल जाये तो या तो उन को ये दुनिया से नफरत  हो जाती है और बो ये दर्द बर्दाश्त नही कर  पते तो या तो बो इस दुनिया को ही छोड़ देते ह या फिर बो अपने आप को इस दुनिया से अलग कर  लेते है फिर उन्हें इस मुहब्बत की बात ही झूटी लगती ह और जो कोई उन से मुहब्बत की बात करता है  तो उनको बो एक कहानी सी लगती है इस लिए दोश्तो मुहब्बत भी सोच कर करो , क्यों की मुहब्बत को भी खुद ने खुद मुहब्बत से बनाया है
मुहब्बत होती बड़ी प्यारी है लेकिन मुहब्बत को मुहब्बत की निगाहों से देखने बालो के लिए ही मुहब्बत बड़ी प्यारी लगती है , कुछ लोग मुहब्बत को पैंसो  से खरीदना कहते है लेकिन मुहब्बत को न ही किसी ने खरीदा है ना ही इसे कोई खरीद पायेगा , जो लोग ये दबा करते है की  उन्होंने मुहब्बत को खरीदा है  तो बो सुन ले की उन्होंने सिर्फ जिस्म को खरीदा  है मुहब्बत को नही , मुहब्बत करने बालो को अपना महबूब इतना प्यारा लगता ह के अगर दुनिया की   दौलत एक तरफ और उस का महबूब एक तरफ तो बह  अपने महबूब को  पसन्द करेगा , अपने महबूब की एक  झलक पाने के लिए बह  सब कुछ लुटाने को तैय्यार हो जाता है  ये है मुहब्बत। ... पर  मुहब्बत भी कई तरह की होती है जैसे की कोई सिर्फ हुस्सन के लिए किसी से मुहोब्बत करता है तो कोई उसे पेसो के लिए मुहब्बत करता है कोई किसी मकसद के लिए तो कोई किसी मकसद के लिए  , बहुत काम ही ऐसे लोग है जो अपने महबूब को सच्ची मुहब्बत करते है जैसे की लेला  मजनू , हीर और रांझना  ऐसी मुहब्बत सिर्फ किस्मत बालो को ही मिल पति है और कई लोग तो ऐसे होते है की बो अपने महबूब को सच्ची मुहब्बत करते है और उन के महबूब को पता तक नही होता के कोई उसे मुहब्बत करता है  इसी लिए लोग कहते ह ना ,
    के मुहब्बत दोनों तरफ से होती ह तो  मज़ा देती है 
  अगर मुहब्बत एक तरफ से होती ह तो सजा देती है
सच्ची मुहब्बत पाने के लिए लोग क्या क्या नही करते , यह तक के बो अपने आप को भी बर्बाद कर देते है और जब मुहब्बत  में धोका मिल जाये तो या तो उन को ये दुनिया से नफरत  हो जाती है और बो ये दर्द बर्दाश्त नही कर  पते तो या तो बो इस दुनिया को ही छोड़ देते ह या फिर बो अपने आप को इस दुनिया से अलग कर  लेते है फिर उन्हें इस मुहब्बत की बात ही झूटी लगती ह और जो कोई उन से मुहब्बत की बात करता है  तो उनको बो एक कहानी सी लगती है इस लिए दोश्तो मुहब्बत भी सोच कर करो , क्यों की मुहब्बत को भी खुद ने खुद मुहब्बत से बनाया है

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