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समझो इनके दर्द को

किसान एक अन्न दाता

धनबानी यहां पाते ईज्जत
मुश्किल में रहते है किसान !!
जिस के कारण हम जीवित रहते
बो परेसान है एय इंसान !

हेल्लो दोश्तो। . . .

दोश्तो यदि आज के इस युग में  देखा जाये तो इस दुनिया में सबसे ज्यादा परेसान हमारे किसान भाई है ! सर्दी हो या गर्मी अपनी फशल को  बचाने के लिए   रात रात भर जागते है  भरी सर्दियों में भी रात रात भर पानी में खड़े रहते है ! फिर दिन में परेसान रहते है और अगर जरा देर बारिश हो जाती है तो घबरा जाते है ! के कहि  हमारी फशल नष्ट ना हो जाये ! फिर  उस को काटते है  बहुत  परेसानी झेलने के बाद उस अन्न  को हम तक पहुचाते है ! और हम  उस  अन्न का  छोटा  सा भाब लगा  कर उनकी तमाम परेशानियों में से एक का भी हक अदा नही करते !
ये है  हमारा इन्साफ !
कभी  कभी  किसान अपने खेत में अपनी फशल बोता है और  बह उस फशल से बड़ी उम्मीद करता है और जब बह फशल बड़ी  हो जाती है तो अचानक बरसात आ जाती है और किसान  का उस बक्त क्या  हाल होता है ये किसी को नही पता हम  तो  लगे रहते है बरसात की तारीफ करने !  और जब किसान की फशल नष्ट हो जाती है तो बेचारा फिर कोसिस करता है और  बह  अपने खेत को गिरबी रख कर लोन लेता है और फिर रातो को जगता है सर्दी में भी  रात को खेतो में खड़े रहकर पानी देता बहुत मुसीबते झेलने के बाद बो इस अन्न  को  मंडी तक लाता है और फिर उस के अन्न की सही  कीमत नही मिलती है तो  बह उदाश हो  जाता  है टूट जाता है  बह
!  हम भी कितने  खुदगर्ज है की हम बेबजह की बशतुओ में तो  बढ़ चढ़  कर पैसे लगा देते  है  चाहे  बो हमारे लिए हानिकारक ही क्यों न हो !  जैसे की मोबाईल को  ही ले लो हम मोबाईल को महंगे से महंगा  खरीदने की कोसिस करते है  मंहगी से मंहगी   कार  और भी बहुत से आइटम जो की मंहगे लेना पसन्द  करते है !  पर जब बात आती है किसानों  से अन्न खरीदने की तो हम उनसे मोल  भाब करते है ! अरे इतना तो  दे दो  जितने में  बह संतुष्ट हो जाये  उनको लगे की  हमारी महंत रंग लाइ ! कभी कभी किसान  क़र्ज़ में इतना  ढूब जाता है के लाख कोसिस करने के बाद भी  बह उस क़र्ज़ से नही निकल   पाता है बह बहुत कोसिस करता है अपने इस क़र्ज़ को कैसे भी  कर के चुकाने  की,,,,!  लेकिन नही  चुका पाता  और बैंक दुआरा लगातार परेसान करने और  घर से  भार करने और सजा देने की  धमकी से परेसान होकर  बह अपने आप  को निज़ात पाने के लिए खुदखुसी बाले  राश्ते को चुनते है
और ये बात हमें भी पता है क्यों की हम हमेसा अखबारों में किसानों की खुदखुसी के बारे में पड़ते है ! किसानों को जब खूब मेहनत करने के बाबजूद भी उस की महनत का फल उसे नही मिलता तो  बह खेती को करना छोड़  कर   शहरो की तरफ बढ जाता है और फिर शहरो में  बो अपना रोजगार तलाश करता है! 
दोश्तो अगर यही हाल रहा तो एक दिन  सारे किसान  अपनी खेती  को छोड़कर और अलग काम में लग जायेंगे  तो सोचो फिर  कौन खेती कौन करेगा ! कहां से आएगा अन्न ? इस लिए हमे  अपने किसान भाइयो का साथ देना चाइये !  सरकार के द्बारा  चलाई जा रही सुभिधाओ के बारे में उन्हें बताना चहाइये और उनके जो भी कार्य है उस कार्य की बेहतर तकनीक के बारे में उन्हें बताना चाहिए । तो दोश्तों अगर मै ऐशा सोचूँगा के बहुत जनसँख्या है उस में मेरा क्या काम है तो हमारा देश हर काम में पीछे रह जायेगा । पहले अपने आप को पेश करो फिर दुशरो की तरफ इसारा करो । क्या पता हमारे कुछ करने पर उनके चहरे पर खुसी की कुछ लखीरे उभर आये ?
तो मै किसानों के साथ देने के लिए तैयार हु और आप.......?
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महबूब की चाल , महबूब की आबाज,
महबूब की आँखे....
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