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Thursday, December 15, 2016

हम बरबाद कर रहे अपने कल को

 " या रब गुनाह गार हम है हमारी सजा इस कुदरत ना देना । अभी आने बाले कल के लोग है इस कुदरत की रहमत से बाकिफ है "
इंसान की ज़िन्दगी इतनी मुख़्तसर सी है और खुआइसे इतनी के हजार बरसो में भी पूरी नही हो सकती । एय इंसान समझा अपने दिल को ये दुनिया किसी के हाथ नही आने बाली । बड़े कहते है के ये दुनिया में इंसान को सबसे बहतरीन मख्लूख बानाया है और फिर उसे दुनिया में भेजा है । और फिर सारी मख्लूख को इंसान के ताबे कर दिया । की इंसान हर जानबर को अपना गुलाम बना लेता इतना दिमाक दिया है हम  को हर तरह से ऊपर बाले ने खूबसूरत बनाया है और राजा बनाया है हर जानबर के ऊपर । लेकिन हम इतने खुदगर्ज़ हो गए है के हम अपनी जिंदगी को एक खुसी के साथ बिताने के बाबजूद भी कुदरत के साथ  में खिलबाड़ करना सिरु कर दिया है जिन पेड़ो को हमारी हवा को सुद्ध बानाने के लिए जमीन पर दिया था उनको काट कर ब्यर्थ के कामो में लेना सिरु कर दिया है नदी तालाब जंगलो पहाड़ो और जो भी कुदरत की जो भी चीज़ है उस के साथ हमने खिलबाड़ करना सिरु कर  दिया । खूब खुस होते है हम कुदरत के साथ खिलबाड़ कर के लेकिन शायद हमें ये पता नही के कुदरत के साथ खिलबाड़ करना सही नही है क्यों की हम तो कुदरत के साथ खिलबाड़ कर के खूब खुस रह लेंगे लेकिन जो बच्चे जिन को हम हमारा भबिष्य कहते है जिन पर हमारे भबिस्य की आस टिकी हुई है और सोचते है के हमारा आगे आने बाले बक्त को ये सबालेंगे । लेकिन कहा से सबालेंगे क्यों की हम ही अपनी ज़िंदगी को तो नर्क के राश्ते पर ले जा रहे है बल्कि उनकी जिंदगी को और बर्बाद कर रहे है सोचो की अभी हम देखते है कि समय पर बरसात नही ही रही है समय पर मौसम में बदलाब नही आ रहा । सुद्ध हबा के लिए लोग दूर जाते है क्यों????
क्यों की जिन पेड़ो और पगड़ो से बादल टकरा कर रुकते थे और बरश्ते थे उनको हमने काटना सिरु कर दिया है  तेज़ गर्मी तेज़ सर्दी सब मानब खुद अपने हाथो से कुदरत के नियमो का उल्लंघन कर रहा है । दोषतो इस दुनिया में ऐसा तो है नही के हम ही रहेंगे हमारे बाद इस दुनिया में और भी काफी लोग आएंगे जिनको भी हक़ है इस कुदरत की खूबसूरती को देखने का तो इस लिए इसे खत्म ना करो बल्कि इस खूबसूरती को और बढ़ाबा दो ताकि यहॉ रहने बाला और भबिस्य में आने बाला हर इंसान एक चेन सूकून के साथ ज़िन्दगी बसर कर सके । 


यदि आपके समझ में आ गया हो तो इसे और आगे बढ़ाओ ताकि सायद किसी की समझ में कुछ आ जाये और वह कुदरत का राखबाला बन जाये ।

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