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काबिल गुरु की बात हक़ और सच होती है

काबिल गुरु की बात हक़ और सच होती है 

बात बहुत पुरानी है  एक गुरु के पाँच शिष्य थे गुरु ने उन्हें हमेशा सच्चा ईमानदार और दयावान बनाने के लिए उन के ऊपर मेहनत की । उन में चार शिष्य तो ऐसे थे जो की गुरु की हर बात को मानते थे । और जो बात एक बार गुरु के मुह से निकल जाती तो बो बात पत्थर की लखीर मान ली जाती थी और बो अपने गुरु की बात को इस तरहा मानते थे जैसे के लोगो को बिसवास होता है के पानी पर कोई चल नही सकता जितना बिसबास हमें इस बात पर होता है इतना ही बिसबास उन्हें गुरु की हर बात और हर सिक्छा पर था। लेकिन एक शिष्य ऐसा था जो की गुरु की बातों पर बिसबास कम करता था । गुरु ने दो बातों को उन्हें सबसे ज्यादा सिखाया बो थी के बड़ो की इज़्ज़त करो और उनका हक कहना मानो और दुशरी बात सिखाई के सब से प्यार से बात करो के अगर आप प्यार से किसी से कोई भी चीज़ मांगोगे तो कोई आपसे मना नही करेगा । सब शिष्य गुरु की बातों को बड़े ध्यान से सुन रहे थे की अचानक एक बोला के गुरुजन माफ़ करना परन्तु ये जो आप ने बात कही है के अगर हम किसी से प्यार से बात ना करेंगे तो बो हमारी बात नही मानेगा ! ये बात आपकी असत्य है क्यों की आज का जमाना प्यार का नही रहा और किसी भी तरह से कोई चीज़ माँगो कोई मना नही करेगा । तो गुरु ने उसकी बातों को सुनकर कुछ नही कहा । कुछ दिन बाद पांचो सिष्य अपने गुरु के साथ जंगल में लकड़ी लेने के लिए गए ।
तभी उन में से एक शिष्य जो की गुरु की बातों पर बिसबास नही करता था उस को पियास लगी । और उसने गुरु से कहा के उसे बड़ी जोर से पियास लग रही है तो गुरु ने कहा के यहां नज़दीक ही एक कुआ है बहाँ जाकर पानी पी आओ । तो वहॉ गया तो देखा की एक बुढ़िया पानी भर रही है तो उसने उस बुढ़िया से चिल्ला कर कहा " ओय बुढ़िया पानी पिला मुझे " तो बुढ़िया को गुस्सा और बोली घर से बाल्टी और रस्सी ले आया और भर के पी ले । इतना कह कर बुढ़िया अपनी मटकी लेकर चली गई ।
बह गुरु के पास बापस आया और बोला के बहाँ एक बुढ़िया ने मुझे पानी नही पिलाया । तो गुरु ने उसे एक और कुआ बताया जो की थोड़ी दूर था । तो बह धीरे धीरे प्यास की हालत में बहाँ पहुच गया । बहाँ उसने देखा की एक स्त्री  पानी भर रही है तो उसने उस स्त्री से भी चिल्लाकर कर कहा " ओ स्त्री मुझे पानी पिला दे " तो उस स्त्री को गुस्सा आया और कहा के अपने आप भर ले और पी ले । और बो पानी ले कर चली गयी । अब तो इस सिष्य की हालत बहुत खराब हो गयी और बो  फिर गुरु के पास बापस आया और कहा के उसे बहाँ भी पानी नही पिलाया । गुरु उस के ब्यभार से अच्छी तरह परिचित था तो गुरु ने बताया के यंहा से थोड़ी दूर एक और कुआ है तुम बहाँ जाओ और बहाँ कोई  स्त्री मिले तो उससे नीची आबाज में कहना के "  माता जी मुझे बहुत तेज़ पियास लगी है कृपया मुझे पानी पिला दो " जाओ । अब बह चल दिया उस की हालत ऐसी हो गई थी के अब अगर उसे पानी नही मिला तो उस की मौत भी हो सकती थी । बो धीरे धीरे चला जा रहा था जैसे तैसे कर के बो उस कुआ पर पहुच गया तो उसने देखा के एक स्त्री  पानी भर रही है उसने उस स्त्री के पास आकर मीठी आबाज में कहा " माता जी मुझे पानी पिला दो मुझे बड़ी जोर से पियास लगी है " तो उस स्त्री ने उसे पानी पिला दिया अब उस के सारी बात समझ में आ गई और समझ गया के प्यार से ही सब कुछ होता है अगर किसी इंसान से प्यार से कुछ भी माँगा जाये तो बो बिलकुल भी मना नही करेगा और अगर हम कठोर बानी में कुछ बोलेंगे तो हमारी अच्छी बात भी सामने बाले को बुरी लग जाएँगी । इस लिए अपनी वाणी का भी सही उपयोग करो क्यों की इंसान की बाणी आदमी को मरबा भी सकती है और बाणी ही मारते हुए  इंसान को बचा सकती है इस लिए बनी का अच्छा उपयोग करो ।उस की आँखों में आंसू आ गए और फिर उसने गुरु की हर बात मानने का प्रण कर लिया । फिर बो अपने गुरु के पास आया और उसने गुरु के पैर पकड़ लिए
और कहा के गुरूजी आज मुझे पता लग गया है मीठी बाणी में कितनी दम होती है फिर उस ने गुरु की हर बात मन्ना सिरु कर दिया और  इतनी म्हणत की के बो काफी अच्छा सिष्य बना । 
फिर उन सब सिष्यो की जब पूरी सिक्छा हो गई तो गुरु ने उन की परिकक्षा की सोची और
एक दिन गुरु ने उन पाँचो सिष्य को बुलाया और  उनके हाथ में एक - एक लकड़ी की छलनी जैसी टोकरी देकर उस के अंदर पानी भर कर लाने को कहा। और कहा के जो इस के अंदर पानी नही ला सकता बो कभी जीबन में सफल नही हो सकता 
【बाकि कहानी दुशरे पार्ट में कृपया जरूर देखें 2 पेजेस पर】
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महबूब की आँखे....
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