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Saturday, December 17, 2016

मेहनत सफलता की कुंजी है बिना मेहनत के कुछ भी हासिल नही हो सकता




एक गुरु के पांच सिष्य थे गुरु ने उनको बहुत ही अच्छी सिक्छा दी थी । गुरु के सारे सिष्य बड़े हो गए थे और उनकी पढ़ाई भी पूरी हो गई थी अब गुरु ने सोचा के इनकी पढ़ाई भी पूरी हो चुकी है तो क्यों ना अब इनकी  परिक्क्षा ली जाये । गुरु ने उनकी परिक्क्षा लेने के लिए नए नए तरीके सोचे और बो उन सब में पास हो गए । तो गुरु ने कहा के शिष्यों अब आपकी एक अंतिम परिक्क्षा  है जो इस परिक्क्षा  में पास हो जायेगा अब वही मेरे साथ रहेगा  । तो गुरु ने उन्हें पांच लकड़ी की डलिया जो की छलनी जैसी थी
उन के हाथ में  थमाई और उनसे कहा के इन डलिया में जो नदी यहां से दो किलोमीटर दूर है बहाँ से पानी लेकर आओ । तो पहले तो सब सिष्य हँसे क्यों की बो समझ रहे थे की गुरु उन से माज़ाक कर रहा है । के इस डलिया में दो किलोमीटर दूर से कैसे पानी आएगा । तो गुरु के चिल्लाकर कहने पर बो डर गए और अपनी अपनी डलिया ले कर चल दिए । राश्ते में बो सोचते जा रहे थे की इस डालिये में पानी कैसे आएगा और बो ऐसे ही सोचते सोचते नदी तक पहुच गए
 और नदी पर जाकर और अपनी अपनी डलिया में पानी भरने लगे । लेकिन पानी नही आता । बो बहुत कोसिस करते लेकिन फिर निकल जाता । और अगर थोड़ा आ भी जाता तो जैसे ही लेकर चलते पानी राश्ते में ही निकल जाता । सब ने खूब मेहनत की लेकिन कोई परिणाम ना निकला । तो एक एक कर के चार सिष्य बहाँ से निकल लिए और अपने गुरु से जाकर बोले की गुरु जी ये काम हम से नही होगा क्यों की डलिया के अंदर कभी पानी आता है क्या गुरु जी आप भी हमें हर कुछ हुकम दे देते हों । गुरु उनकी बातों को सुन कर चुप रहे । लेकिन एक सिष्य जो की कभी गुरु की बात नही मानता था बो एक घटना के बाद गुरु की हर बात मानने लगा और बो अपने गुरु की बात दिल में पकड़ रखी के मेरे गुरु की बात कभी झूटी नही हो सकती । अगर उन्होंने हमें ये डलिया देकर भेजा है तो इस डलिया में पानी आएगा जरूर आएगा। और बो लगा रहा उस डलिया में पानी भरने । उसे उस डलिया में पानी भरते भरते साम और फिर साम से सुबहा हो गई लेकिन बो लगा रहा । तो फिर धीरे धीरे लकडियो का फूलना सिरु हो गया और जो डलिया में छेद थे बो लकड़ी फूलने के कारण बंद हो गए और एक बक्त ऐसा आया के उस डलिया में पानी रुकने लगा और आखिर में पूरी तरहा से रुक गया । तो फिर बो उस पानी को लेकर अपने गुरु  के पास गया । तब बो चार सिष्य बही थे और बो जब डलिया में पानी लेकर आया तो सब की आँखे फटी की फटी रह गई । उनकी समझ में कुछ नही आया के ये इस डलिया में पानी कैसे ले आया? लेकिन जब पता लगा के इस ने हार नही मानी तो इसे ये सफलता मिली  है । तो उनकी सारी बात समझ में आ गई  और उनके गुरु ने कहा की गुरु जी आप जो हमें हुकम देते हो बो सब सही देते हों हमे माफ़ कर दीजिए गुरु जी......
तो गुरु ने कहा की मेरे शिष्यो " मेहनत ही सफलता की कुंजी है " अगर इंसान मेहनत करे तो कैसी भी कठनाई हो इंसान उस में भी सफलता प्राप्त कर लेता है अगर आप सिरु में ही किसी मुसीबत से डर कर हार मान लेंगे तो फिर आप सफलता को प्राप्त नही कर सकते इस लिए मेरे बच्चो काम को छोड़ो मत चाहे बो काम तुम्हारे बस में नही है लेकिन लगे रहो आप जरूर सफलता प्राप्त कर लोगे......।
उन की बात समझ में आ गई बो बच्चा जो डलिया में पानी भर कर लाया बो गुरु का चाहिता 

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