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इंसान के लफ्ज़ आदमी को भिकारी बना सकते है । जानिए कैसे...?

इंसान के लफ्ज़ ही इंसान को भिकारी बना सकते है




एक बहुत ही बुजुर्ग इंसान था जिस का नाम था जनाब बहलोल दानाकिसी । बो अपने रब की इबादत में इतना मासगूल यानि bizi   रहता के लोग उसे पागल दिबाना कहने लगे । लेकिन साथ ही लोग उस की इबादत और उस के कारनामो से बाकिफ थे । बो जो भी बात बोल देता था बो पत्थर की लखीर मान ली जाती थी । कभी कोई आदमी किसी भी बड़े काम को करने की सोचता तो उस की राय जरूर लेता । और बो उसके फायदे के मुताबिक उन्हें राय देता था । वही सहर में एक ब्यपारी रहता था जो की बड़े बड़े ब्यपार करता था । एक दिन वह अपने नए ब्यपार की तालाश में था और तिजारत के लिए कुछ सामान लेने दुशरे सहर जा रहा था । कि राश्ते में उस की नजर जानब बहलोल पर पड़ी । तो बह ब्यपारी उस के पास आया और सालाम कर के उस के सामने  बैठ गया और बे इंतहाई अदब से गुजारिश की " हुजूर तिजारत ( बेचने ) की ऐसी कौनसी चीज़ खरीदूँ जिस में बहुत मुनाफ़ा (लाभ)हो " तो जनाब ने फरमाया की काला कपडा ले लो
। तो ब्यपारी ने सुक्रियादा किया और उलटे कदमो से लौट गया । तो उसने सहर की तामाम सभी जगहों से काला कपडा खरीद लिया और ब्यपार सिरु कर दिया । की कुछ ही दिनों के बाद शहर के एक बड़े राहीस आदमी की मौत हो गई तो मातमी लिबास के लिए पूरा शहर काले कपडे की तालाश में निकल पड़ा । तो उस ब्यपारी के पास काला कपडा मौजूद था तो उसने उस कपडे को मुह मागी रकम में बेचा । तो उस दिन उसने इतना रुपया कुमाया की इतना उसने अपनी पूरी ज़िंदगी में कभी भी नही कुमाया होगा । ब्यपारी बहुत खुश हुआ । और अब उस के पास बेसुमार दौलत हो गयी थी । धीरे धीरे दौलत का नशा उसे चढ़ने लगा यानि उस को अपनी दौलत का घमंड होने लगा और बो अपनी दौलत से नाजाइज़ काम करने लगा । लोगो को परेशान करने लगा । एक दिन बह अपने घोड़े पर साबर होकर अपने ब्यपार के मसले में कहि जा रहा था की अचानक उस की नज़र जनाब बहलोल पर पड़ी । तो उस ने घोड़े पर से ही चिल्लाकर कर कहा " अबे ओय पागल दीबाने अब क्या लाऊ तिज़ारत (बेचने) के लिए ? " तो जानाब ने फिर उसी अंदाज में कहा के तरबूज ले लो । बस फिर क्या था.....
। बह जल्दी से अपने घर गया और घर में जितनी भी दौलत थी बल्कि अपना घर भी गिरबी रख दिया और सारे पैसो से तरबूज खरीद लिया । क्यों की उस की ये सोच थी के अवकी बार भी कोई ऐसा ही कारनामा होगा । तो उस ने तमाम सहर से तरबूज़ खरीद लिया और सहर के बीच एक मैदान में रख लिया । एक दिन गुजरा ...! दूसरा दिन गुजरा ....! यहाँ तक के सात दिन गुजर गए लेकिन उससे कोई भी तरबूज़ लेने नही आया । अब तरबूज़ का सड़ना सिरु हो गया तो सहर के लोगो ने उसे उस को बहाँ से दूर ले जाने की बोली उस के ना कहने पर सहर बसियो ने उसे मारना सिरु किया क्यों की अब उस का तरबूज़ पूरी तरहा शड गया था । तो सहर बासियों ने उसे मारने की ठान ली बह किसी तरह बहाँ से बचके भाग निकला । अब बह बिलकुल कंगाल हो गया था उस के पास अब कुछ भी नही रहा । बो एक एक पैसे के लिए मोहताज़ हो गया । बो शहर बासियों से छुप कर गली गली मारा मारा फिर रहा था । की अचानक उस की नज़र जनाब बहलोल पर पड़ी तो दौड़ कर उस के पास गया और गुस्से से बोला के ये क्या किया आपने मेरे साथ ? तो जनाब ने कहा ये मेने नही तेरे दौलत के नशे ने और तेरे लहजो लफ़्ज़ों ने तेरे साथ ये किया है के जब तूने अदब से पूछा तो मालामाल हो गया और बे अदब से पूछा तो कंगाल हो गया । तेरे गुरुर ने तुझे बर्बाद किया है  । अगर तू तेरी दौलत का सही इश्तमाल करता तो तेरा यह हाल नही होता । उसे अपने किये पर बहुत पछताब हुआ और उसने अपनी गलती मानी और जनाब से माफ़ी मांगी और चल दिया । दोस्तों अपने लहजो लफ़्ज़ों का और अपनी कुमाई हुई दौलत का सही इश्तमाल करो क्यों की आपके लफ्ज़ ही आपकी तर्बियत आपका मिज़ाज़ और आपके खानदान की निशानी बता देती है
परिंदे अपने पांब और इंसान अपनी जुबान की बाजह से जाल में फश्ते है । इस लिए बोलने में नर्मी रखे क्यों की बाणी अच्छे अच्छे पत्थर दिलो को भी पिघला देती है ।
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दोस्तो आज मैं एक ऐसी ही कहानी लाया हूं जिसे सच मे पड़ कर आप बर्दास्त नही कर पाएंगे ।
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रीनू बहुत ही बदमास और  नटखट किस्म की लड़की थी । जो कि हमेसा किसी को ना किसी को छोटी छोटी बात  पर सजा देती रहती थी । रीनू किसी पर भी दया नही करती थी । क्यो की उसे अपने पापा की इस ताकत पर घमण्ड था । बो इंसान को इंसान नही समझते थे । सब से दादागिरी से बात करना । बही दूसरी तरफ एक लड़का था जिस का नाम था सूरज


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एक सहर में एक ब्यापारी का लड़का रहता था । जो कि बहुत ही नटखट था । बो बहुत ही सुंदर और चालाक था ।


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