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Friday, December 30, 2016

बाप की खिदमत की तो मिल गई सारे जहां की दौलत और तंग किया तो हो गए बर्बाद । सच्ची कहानी .... जरूर पड़े

 बाप का दिल दुखाया तो  सुन ले के खुदा का क़ानून बड़ा सख्त रहेगा ।।
कितनी भी दौलत कुमा ले मगर  परेसान बो हर बक्त रहेगा।
जिसने माँ बाप को कर लिया खुस बो दुनिया में भी बड़ा नाम पायेगा ।।
सोहरत के साथ जियेगा जिंदगी इस जहान में और
 खुदा के पास भी बो बड़ा इनाम पायेगा ।



दोस्तों इससे पहले बाली कहानी में तो मैने आपको उसके बारे में बताया था जिसने अपने माँ बाप की खिदमत नही की यानि उन्हें सताया था और अब इस कहानी में मै आपको बताऊंगा के अगर कोई अपने माँ बाप की खिदमत करता है तो उसे खूदा क्या इनामात देता है तो चलिए आज इस कहानी को भी पड़ते है । दोस्तों आप से गुजारिश है के कृपया इसे पूरी जरूर पड़े । 
दोस्तों एक गांब में एक पिता के चार पुत्र थे उनकी माँ अपने चौथे पुत्र  को जन्म देने के बाद ही मर गई थी । उन सब की देखभाल उनके पिता ने ही की । बो चारो अपने पिता की हर बात को मानते और उस की इज़्ज़त करते थे पिता ने सब की सादी बक्त के हिसाब से ही करा दी । अब पिता थोड़ी बृद्ध अबस्था पर पहुच चूका था अब पिता के सरीर से मेहनत नही होती इस लिए वह अब घर रहने लगा लेकिन जब उनका पिता और बूढा हो गया तो कुछ सालों तक तो उन्होंने उसकी खूब खिदमत की लेकिन फिर धीरे धीरे बो उसको एक बोझ सा मालूम करने लगे।  पर उसका सबसे छोटा पुत्र अब भी उसकी खूब खिदमत करता । और उससे उतना ही प्यार करता जितना उस को सिरु में था । लेकिन जब वह देखता की उनके भाई की बीबी उनके पिता के साथ बहुत बुरा ब्यभार करती है और उनके भाई भी अब उसकी कोई बात नही मानते है । तो उस को बहुत दुःख होता लेकिन बो क्या करे क्यों की वह बेरोजगार था इस लिए सब कुछ देख कर भी कुछ नही कर सकता था । उस के पिता की दिना दिन हालत बिगड़ती जा रही थी और उनके तीन पुत्र और उनकी बहु उस के साथ बहुत बुरा ब्यभार करते थे तो एक रात उस ने बहुत हिम्मत कर के घर में एक मसबरा किया और उसने अपनी बात रखी के तुम पिताजी पर जो जुल्म करते हो ये अच्छा नही है इससे अच्छा तो ये है के  पिता जी को मुझे दे दो मै इसे लेकर कहि दूर चला जाऊंगा और इस की खूब खिदमत करूँगा ।  तो उन्होंने सोचा के ये पिताजी को यहाँ से ले जायेगा और उसे अच्छा कर के सारी दौलत को अपने नाम करा लेगा इससे अच्छा तो यह है के इस बुड्ढे को यही मरने दिया जाये तो उन्होंने मना कर दिया ।
तो उसने कहा के मुझे तो आप सिर्फ मेरे पिताजी को मुझे दे दो और सारी दौलत को आप ले लो मुझे आप एक तिनका भी मत देना और मै ये बात आपको लिख कर दूंगा की मुझे दौलत का एक तिनका भी नही चाहिए । तो बो राजी हो गए और उन्होंने ये बात लिखित मे ले ली ताकि बाद में अपनी जुबान से फिरे नही । फिर बो अपने पिता को लेकर घर से निकल गया उस बक्त उसकी बीबी भी उसी के साथ में थी जो की बड़ी नेक थी और सब्र करने बाली थी । जब बह घर से निकला था तो उस के पास कुछ नही था सिवाय अपनी बीबी के कुछ गहनों के । तो उसने उन्हें बेचा और जो कुछ पैसे आये थे उन पैसो से एक किराये का घर लिया जिसमे उन्होंने रहना सिरु किया । और कुछ पैसो से घर की जरूरियात का सामान और एक कुलहाड़ी खरीद कर ले आया । अब वह रोज जंगल में जाया करता और जंगल से लकड़ी काट के लाता फिर उन्हें बाजार में बेचता जो कुछ पैसे कुमाता उनमे से  कुछ पैसो से घर का सामान खाने पीने का लाता और कुछ पैसो से अपने पिता की दबाई ले आता । ऐसे ही दिन गुजरते रहे । के कुछ महीनों बाद अचानक उस के पिता की तबियत और ज्यादा खराब हो गई तो उसे दिखाने के लिए ज्यादा पैसो की जरूरत पड़ी  और उस के पास इतने पैसे नही थे तो उसने इधर उधर से उधार पैसो का इंतज़ाम किया और अपने पिता का खूब अच्छा इलाज़ कराया लेकिन इस के बाबजूद भी वह नही बच सका और बो इस दुनिया से चल बसे ।  इस को अपने पिता के जाने का बहुत गम था अब बो लोगो का कर्ज़दार भी हो गया और अब तो बो अपने घर भी नही जा सकता था क्यों की इसने पिता की खिदमत के लिए अपनी भी दौलत अपने भाइयो के नाम करा दी थी ।  अब उस ने अपनी ज़िंदगी को उसी गरीबी के साथ काटना सिरु कर दिया । पर जब कुछ गरीबी ने और कुछ कर्ज बालो ने बहुत ही ज्यादा सताया तो उसने सोचा के क्यों ना मै अपने भाइयों से थोड़ी मदत ले लू क्या पता बो मेरी कुछ मदत कर दे ? तो बो अपने भाइयो के पास गया और अपनी गरीबी का हाल बताया और कहा के आप मुझे थोड़े पैसे उधार दे दो मै कुछ दिनों में आपको दे दूंगा । तो उनके भाइयो ने बाजाय मदत के बल्कि उस का मज़ाक उड़ाया और तालियां मार मार कर हँसने लगे और कहने लगे की सारी दौलत को ठोकर मार के उस बीमार बाप को ले गया । अच्छा हुआ बल्कि तू उस को यहॉ से ले गया नही तो उसकी हमें और देखभाल करनी पड़ती और हमारा भी पैसा जाया होता । अब जा उसी से ही पैसे ले ले......  हमारे पास नही है कुछ भी  और उसे धक्के देकर घर से बहार निकाल दिया। बो अपना मायूस चेहरा लेकर बहाँ से बापस अपने घर आ गया । और फिर अपने घर में ही जैसी मिलति रूखी सुखी उसी से दोनों पति पत्नी अपना गुजारा कर लेते थे एक रात उसे एक खुआब (सपना) दिखा के एक बुजुर्ग उससे कह रहा है के तेरे घर के पीछे एक दीवार है उस दीबार में एक मटका है और उस मटके में 100 असर्फिया है तुम जाकर उन्हें ले लो । तो इसने उससे पूछा के क्या उनमे बरकत (चैन सुकून)है । तो उस  ने कहा के बरकत तो नही तो उसने उन्हें लेने से मना कर दिया । फिर जब सुबह उस की आँख खुली तो उसने सारा सपना अपनी बीबी को सुनाया । तो बीबी ने उससे कहा के ले आओ हमारी गरीबी भी दूर हो जायेगी । पर इनमे बरकत नही थी इस लिए  वह उन्हें नही लेने गया । और उसने सोचा के सपना ही तो है झूठ भी हो सकता है । फिर दूसरे दिन वही बुजुर्ग उसके सपने में आये और कहा के तेरे घर के पीछे उस दीबार में 50 असर्फी है उन्हें लेलो। तो उसने कहा के उस में बरकत है बुजुर्ग ने कहा के बरकत तो नही है । तीसरे दिन भी वही बुजुर्ग उनके खुआब में आये फिर उससे बही बात कही लेकिन अब उसने 10 अशर्फियों का होने को कहा और  हमेशा की तरह बह बरकत की पूछता बुजुर्ग  मना कर देता और बह नही लेकर आता था । जब चौथी रात को बह बुजुर्ग फिर उसके सपने में आये और कहा के फ्लॉ जगह पर एक असर्फी है तुम जा कर उसे लेलो । तो इसने फिर यही सबाल किया के क्या उस में बरकत है तो बुजुर्ग ने कहा के हाँ उसके अंदर बरकत है । तो वह सुबह बिना अपनी बीबी को बताए गया और उसने इस दीबार को खोदा तो उसके अंदर एक माटी की मटकी निकली जिसके अंदर सिर्फ एक ही असर्फी थी । बो उस असर्फी को लेकर बाजार गया और  उसने सोचा के क्यों ना आज कुछ अच्छा खाना खा लिया जाये । तो उसने साम के खाने के लिये उस असर्फी से एक मछली खरीदी और उसे घर ले आया । और घर आकर उसने जब उसे बनाने के लिए जब काटा तो उसके पेट में दो मोती ऐसे निकले के उनकी चमक से उनका सारा घर रोसन हो गया ।  उसने उन मोती को उठाया और एक जौहरी के पास गया जो की हीरे मोती खरीदता था । उसने उन मोतियों को देखा तो उस की रूह काँपने लग गई और कहने लगा के भाई इनके बदले मै अपने पूरे घर की दौलत भी तुझे दे दू तो भी मै तेरे इन मोतियों की कीमत अदा नही कर पाउँगा । उस के मोती की खबर पूरे शहर में जंगल की आग की तरह फैल गई और ऐसे ही बो खबर वहाँ के बादसाह (राजा) के पास पहुच गई तो बादसाह ने उसे बुलाया और उन मोतियों को देखा तो बो भी उन मोतियों को देखकर दंग रह गया और बादसाह ने उसे 90 घोड़े अशर्फियों से लादकर  दिए और उससे कहा के मै अब भी तेरे इन मोतियों की कीमत अदा नही कर पाया हूं । और मेरे पास धन आएगा तो मै तुझे पहुचा दूंगा । तो उस गरीब उस बादसाह का सुकक्रिया अदा किया और उन घोड़ो के लेकर अपने साथ चल दिया । फिर उसने अपना सारा क़र्ज़ चुकाया और अच्छा सा घर और अपनी जरूरियात का पूरा सामान खरीद लिया और अब बो रहीसो की तरहा अपनी ज़िन्दगी गुजारने लगा । और जो उस के भाई जहाँ रहते थे बहाँ कुछ ऐसा हुआ की उनके घर में रोग (बीमारी)फेल गया और घर के सब लोग उस से परेशान रहने लगे । उन के पास जितना भी धन था सब उस रोग की दबाई कराने  में खर्च हो गया और रोग भी ठीक नही हुआ । फिर एक रात को जोर दार बारिस आ गई और साथ में तेज़ तूफ़ान भी आने लगा इतना तेज़ की उनका घर भी हिलने लगा तो घर के गिर जाने के डर से बो सब बहार निकल गए थोड़ी ही देर बाद तेज़ तूफ़ान के  कारण उनका घर भी गिर गया और तहस नहस हो गया । पहले ही बिमारी से परेशान और अब घर भी छिन गया । तो बो रोने लगे क्योकि अब बो बिलकुल बर्बाद हो गए फिर किसी ने उनसे कहा के फ्लॉ जगह एक बहुत बड़ा रहीस रहता है  जो की बो गरीबो की खूब मदत करता है आप भी बही चले जाइए हो सकता है के बो आपकी भी कुछ मदत कर दे । तो तीनो भाई अपनी बीबियों और बच्चो के साथ बहाँ पहुच गए । घर के बहार खड़े दरबार से उन्होंने कहा के हमे आपके मालिक से कुछ मदत चाहिए । हमे उनसे मुलाकात करनी है तो दरबार अपने मालिक को बुला कर लाया । जब मालिक बहार आया और उन्होंने उसे देखा तो सब हैरान रह गए क्यों की बो उनका सबसे छोटा भाई था जो की बिलकुल गरीब था और उन्होंने बुरे बक्त में उसका साथ भी नही दिया था । तो बो आपस में कहने लगे के हम ने इसे कुछ नही दिया था तो हमे क्या देगा और मायूस होकर जाने लगे । तो उसने अपने भाइयों को रोका और बहुत खुश हुआ उनको गले से लगाया और अंदर बुलाया फिर उनकी खूब खिदमत की फिर उनसे आने की बजह पूछी तो उन्होंने सारी बात बता दी । इसके बाद छोटे भाई ने पहले तो उनकी बीमारी का अच्छे से इलाज़ कराया और उनके लिए अच्छा ही रहने का इंतज़ाम कराया । उन भाइयो के समझ में नही आ रहा था के इसके पास इतना रुपया आया कहां से ? और उन्होंने इस की बजह पूछी ? तो उसने कहा के ये सब मुझे मेरे बाप की खिदमत उसकी देखभाल करने से मिला है उसकी दुआओ का ये फल मिला है मुझे । तो उन भाइयो को सारी बात समझ में आ गई और फिर अपने किये पर बहुत पछताये ।
तो दोस्तों अगर माँ बाप की खिदमत कोई करता है तो खुदा दौलत तो उनके कदमो में डाल देता है । और जो डालने माँ बाप को सताता है तो यहाँ भी उस की जिंदगी एक जिल्लत के साथ गुजरती है और जब बह मर जाता है और तो ईश्बर के यहाँ भी बो सजा का हकदार होता है । इस लिए जितनी हो सके अपने माँ बाप की खिदमत करनी चाहिए और उन्हें खुस रखना चाहिए ।
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