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Tuesday, January 3, 2017

क्यों की डर के आगे जीत है

भय को भगाएं

जहाँ भय है वहां आत्मविश्वास नहीं हो सकता। भय के चलते ही हमारा आत्मविश्वास लडखडाने लगता है और हमारा पूरा व्यक्तित्व प्रभावित होता है। इसलिए कलम और कागज़ लें और उन पर एक-एक करके अपने भय लिखें, जैसे- मंच पर बोले से भय, नए लोगों के सामने जाने से भय, लोग क्या कहेंगे इस बात का भय, आदि। उस भय पर विचार करें और किसी एक पर विजय पाना चालू करें। पूरी योजना सहित प्रयास करें, फिर दूसरे को चुने। ऐसे एक-एक करके अपने मन से भय को निकालें, फिर वह भय स्कूटर चलाने या अँग्रेजी बोलने का ही क्यों न हो। आप पायेंगे कि आपका भय जाने लगा है और आत्मविश्वास आने लगा है। साथ ही जिन चीजों से आपको भय लगता है उससे बचने के बजाय उन्हें बार-बार करें। ऐसा करके भय भागेगा और आत्मविश्वास आयेगा।

Fear keeps the


Where there is fear there can not be confidence. For fear Ldkdane think our confidence and our whole personality is affected. Take the pen and paper and write their fears on them one by one, such as fear of speaking on stage, in front of new people from fear, fear of what people will say, etc. Consider the fear and overcoming one turn. Try including the entire scheme, then select the other. One by one, remove the fear from your mind, then he fears scooter rides or speak only in English. You will find that you are beginning to fear it is becoming more confident. Along with the things you are afraid to repeat them rather than avoid him. By doing so, fear and confidence will flee.


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