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एक सच्ची कहानी जो आपको रुला देगी । जरूर पड़े


दोस्तों इस छोटी सी ज़िन्दगी में अगर हम किसी जरुरत मंद को कुछ दे देते है तो हम उससे कंगाल नही होते या हम उससे लूटते नही है । हमें कभी - कभी बाज़ार या हमारे घर के आस पास ऐसे लोग पैसे मांगते नज़र आ आते है जो की बिलकुल सही है । यानि बो सकल से और हुलिए से भिकारी नही लगते यानि बो किसी जरुरत के ज्यादा सताने के बाद ये फैसला लेते है  कि कहि चल कर कोई मदत ली जाये और ऐसे लोग कभी कभी हमारे पास भी आ जाते है । और  हम उनकी सख्त जरूरतों को सुनने के बाबजूद भी उनको उनकी जरुरत के मुताबिक कोई मदत तो नही करते बल्कि उन्हें चार पांच भाषण जरूर दे देते है । जैसे :- " कुमाकर क्यों नही खाते , कुछ काम धंधा क्यों नही करते , बघेरा बघेरा ...!
दोस्तों हमें क्या पता के बो अपनी किस जरुरत के लिए पैसे मांगने में किस बजह से मज़बूर है , उसने कितना सोचने के बाद ही ये फैसला लिया होगा । क्या पता हमारी थोड़ी सी मदत से उसका कोई बड़ा काम बन जाये और बो हमें ज़िन्दगी भर दुआए देता रहे ।
और क्या पता हमारी मदत न करने से उसका कितना बड़ा नुक्सान हो जाये , जिस पर बो ज़िन्दगी भर अफ़सोस करे ।
तो दोस्तों मेरे आज के इस ब्लॉग में आपको एक ऐसे ही सख्स की कहानी का ज़िक्र करूँगा जिस को पड़ने के बाद आपकी रूह कांप उठेगी , आपका मन भी रोने लग जायेगा । तो आइये दोस्तों ......
के एक बार में अपने एक दोस्त के साथ सफर कर रहा था । जब हमारी गाड़ी ट्रैफिक सिग्नल पर रुकी तो एक भिकारी ने आकार हमारी गाड़ी की विन्डो को बजाया

। मेरे दोस्त ने बिन्डो खोली और उसे एक पचास का नोट निकाल कर दिया । जब मैने उसे ऐसा करता देखा तो कहा के ये लोग झूठे होते है । इन लोगो से कुमाकर तो खाया नही जाता , भीक मांग कर खाते है और उदम करते फिरते है । ऐसे लोगो को भीख नही डालना चाहिए । तो मेरे दोस्त ने हलकी सी मुश्कुराहट के साथ मेरी तरफ देखा और कहा के पहले में भी ऐसा ही समझता था में भी इन लोगो को भगा  दिया करता था । लेकिन आज से दो साल पहले जब मेरे साथ एक घटना ऐसी घटी के मेरी फिर कभी किसी भिकारी को खाली हाथ भागने की हिम्मत नही होती । तो मैने उस घटना को सुनने का जब इकरार किया तो उसने बताया के
आज से दो साल पहले में एक जगह से अपनी गाड़ी लेकर गुजर रहा था । जब मेरी गाड़ी एक सिग्नल पर रुकी तो एक आदमी मेरी गाडी के सामने आया और जोर जोर से मेरी बिन्डो को बजाने लगा ।
मेने गुस्से में जब बिन्डो खोली तो उसने मेरा हाथ पकड़ लिया और रो रो कर मुझ से कहने लगा के "
साहिब मेरी मदत करो मेरा बच्चा बहुत बीमार है ,
मुझे इतने से पैसे दे दो के में उसे अस्पताल पहुचा साखू ,
साहिब मुझ पर रहम करो ,
में आपके पैसे जल्दी ही बापस कर दूंगा ,
मेरा बच्चा अगर अस्पताल नही गया तो बो मर जायेगा साहिब ।
साहेब मुझ पर रहम करो , मेरा बच्चा मर जायेगा ।
तो में उस की बातों को सुन कर बजाय उस की मदत करने के बलकि उससे कहने लगा के नए नए  बहाने बनाने की बजाए  कुछ मेहनत कर के कुमाओ ।
दिन भर में कितना झूट बोलते हो । मेहनत कर के खाने में जोर आता है तुम लोगो को ।
और मैने इतना कह कर अपनी कार का सीसा चढ़ा लिया और वँहा से निकल लिया । तो बो बड़बड़ाता हुआ " ये हराम खोर हमारी बातो पर यकीन नही करते " कुछ ऐसे कहता हुआ चला गया । बो ना जाने कितनी देर पहले से अपने बच्चे की ज़िंदगी के लिए भीक मांग रहा था और जब में वँहा से निकल गया तो ना जाने कितनी देर तक मांगता रहा ।
पर उस की सायद किसी ने मदत नही की । क्यों की जब
कुछ घंटों बाद मेरा वँहा से बापस गुजर हुआ तो मेने देखा के कोई आदमी सड़क के किनारे एक बच्चे की लाश को सामने रख कर बड़ी जोर जोर से रो रहा है ।
 तो जब मैने गाडी उस के पास से ली तो मुझे पता लगा के ये बही आदमी है जो कुछ घण्टो पहले पैसे मांग रहा था । बो अब भी पैसे मांग रहा था लेकिन अब बो पैसे उस के इलाज़ के लिए नही बल्कि अब बो उस के कफ़न और दफन के लिए मांग रहा था ।
एय दोस्त अगर में उस की थोड़ी देर पहले कुछ मदत कर देता तो शायद में उस के उस फूल जैसे बच्चे को बचा लेता लेकिन पहले मुझे मेरे गुरुर और मेरे मॉल की मोहब्बत ने ऐसा नही करने दिया । अब में गाडी से उतरा और उस के पास जाकर जो भी पैसे मेरी जेब में थे मेने सारे निकाल कर उस के सामने रख दिए । बो अपने बच्चे के सीने पर सर रख कर रो रहा था । इससे पहले की बो अपना सर ऊपर उठा कर मुझे  देखता में अपनी गाड़ी में सबार होकर वँहा से सीधा अपने ऑफिश की तरफ निकल लिया । में जब ऑफिश पहुचा तो मेरे ऊपर एक बहुत गहरी मायूसी छा गई और सारे बदन में एक बेचनी सी  लग गई थी । मुझे अपने मन से एक आबाज बार बार आ रही थी के उस बच्चे को तूने मारा है , उस बच्चे की मौत का जिम्मेदार तू है तू है ।।।।।।
मेरा किसी भी काम में अब मन नही लग रहा । मेने ऑफिश की सारी मिटींग केंसिल कर दी अब मेरा मन किसी भी काम में नही लग रहा था । ऐसा लग रहा था जैसे मुझे बहुत तेज़ बुखार आ गया है । कुछ दिन मेरे इसी हाल में निकले । में अभी अच्छी तरह से उस दिन को भूल भी नही पाया था के में देखता हूं  के कोई आदमी मेरा  नाम पूछता और मेरी तलास करता मेरी ऑफिश की तरफ आ रहा है में उसे देख कर घबरागया ।
बो जब मेरे बिलकुल करीब आ गया तो एक मीठे आबाज में बोला " साहेब आपके पैसे बड़े बरकत बाले है , मेने इन पेसो से सारे काम कर लिए और सारे काम करने के बाद में ये पैसे बचे है जिनको में लेकर आ गया हूं " उसने बो पैसे मेरे हाथ में थमा दिए और कहा " साहेब बाकि के पैसे में आपको जल्दी ही बापस कर दूंगा । इतना कह कर जब बह बापस जाने लगा तो मेने उसे बुलाया और बो बचे हुए पैसे उसे दिए । तो उसने लेने से इंकार कर दिया । जब मैने सकती से उस पर जोर दिया तो उसने उन्हें ले लिया । और मेरा सुक्रिया अदा कर के जाने लगा । जब बह थोड़ी दूर चला गया तब मैंने उसे बुलाया और उस से अपने ऑफिस में नोकरी देने की बात कही । तो बो बड़ा खुस हुआ जैसे बह कब से कोई नोकरी की तलाश में ही भटक रहा हो । अब मेने उसे अपने ऑफिस में गार्ड की नोकरी दे दी । बो मेरी ऑफिश में रोज समय पर आता है और खूब अच्छी से नोकरी करता है ।र में अपने रब का सुक्र अदा करता हु  इस बात पर के उसने मुझे आज तक पहचाना नही । कि में बो ही आदमी हु जिसने उसे उसकी जरुरत के बक्त पर पैसे नही दिए । में आपको भी उस से मिलबाउंगा लेकिन आप उस से बो दिन बाला जिक्र ना करना बर्ना उस के दिल को बड़ी ठेस पहुचेगी । इस लिए ऐसा ना करना ।
दोस्त किसी को कुछ देने से आदमी गरीब नही होता । और रही लूटने की बात तो हमें कौन नही लूटता , कपडे बाले हमें लूटते है , जूते चप्पल बाले हमें लूटते है और भी ऐसे लोग जो हमें अपने सामान का दोगना भाब हमें बता कर लूटते है और हम खुसी खुसी उनको अपने भाब से भी ज्यादा रूपये दे कर चले आते है । हम बहुत सी फालतू चीज़ों में अपने पैसे यु ही खर्च कर देते है अगर हम फालतू चोज़ो में अपना पैसा खर्च न कर के किसी गरीब की मदत करे तो बो ज़िन्दगी भर हमारा एहसान मानेगा । इस लिए दुसरो की परेशानियों को समझना शीखो । उनकी मदत करना शीखो । अगर हम गरीबो की सुनेंगे तो बो हमारी सुनेगा । अगर हम गरीबो पर रहम करेंगे तो खुदा हम पर रेहम करेगा ।
तो फिर मुझ पर मेरे उस दोस्त बात सुनकर कुछ ऐसा असर हुआ के उस दिन से आज तक मेने किसी भी मांगने बाले को कभी खली हाथ जाने नही दिया । और आप से भी गुजारिस है दोस्तों.... कि आप भी किसी गरीब को खली हाथ  बापिस न जाने दे । क्या पता की बो आपके पास कोनसी फ़रियाद लेकर आया हो । और क्या पता उस गरीब की कोनसी दुआ हमारे काम आ जाये ।
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